कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले लाखों EPS-95 पेंशनधारकों के लिए साल 2026 कई नई उम्मीदें लेकर आया है। लंबे समय से प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र के कर्मचारी अपने बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
वर्तमान में पेंशनरों की नज़रें मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर टिकी हैं: पहला- हर महीने ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन (Minimum Pension) और दूसरा- पेंशन कैलकुलेशन के लिए ’36-मंथ नियम’ (36-Month Rule) में राहत। आइए इस आर्टिकल में विस्तार से समझते हैं कि EPFO Pension Update 2026 के तहत इन दोनों नियमों का मौजूदा स्टेटस क्या है और इससे आम कर्मचारियों को क्या फायदा होगा।
1. क्या है ₹7,500 प्रति माह पेंशन की मांग?
EPS-95 (Employees’ Pension Scheme 1995) के तहत वर्तमान में कर्मचारियों को न्यूनतम ₹1,000 प्रति माह पेंशन दी जाती है, जो आज की महंगाई के हिसाब से बहुत कम है। नेशनल एजीटेशन कमेटी (NAC) और अन्य कर्मचारी संगठन लंबे समय से सरकार और EPFO से यह मांग कर रहे हैं कि इस न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह किया जाए और साथ में महंगाई भत्ता (DA) भी दिया जाए।
अगर लेबर मिनिस्ट्री (Labor Ministry) और EPFO बोर्ड 2026 में इस मांग को मंज़ूरी दे देते हैं, तो देश के लगभग 75 लाख पेंशनधारकों को सीधा फायदा मिलेगा।
EPS-95 Pension Structure (वर्तमान vs प्रस्तावित)
नीचे दिए गए चार्ट से समझें कि पेंशनधारक वर्तमान में क्या पा रहे हैं और उनकी नई मांग क्या है:
| विवरण (Particulars) | वर्तमान स्थिति (Current Rule) | नई मांग / प्रस्तावित (Proposed Rule) |
| न्यूनतम मासिक पेंशन | ₹1,000 प्रति माह | ₹7,500 प्रति माह |
| महंगाई भत्ता (DA) | पेंशन पर DA नहीं मिलता | पेंशन के साथ DA जोड़ा जाए |
| मेडिकल सुविधा | सीमित या नहीं | पति-पत्नी दोनों के लिए मुफ्त मेडिकल |
| लाभार्थी | EPS-95 के 75 लाख पेंशनर | सभी मौजूदा और नए पेंशनधारक |
2. 36-मंथ नियम (36-Month Rule) में राहत का क्या मतलब है?
EPFO पेंशनर्स के लिए दूसरी सबसे बड़ी चिंता पेंशन कैलकुलेशन फॉर्मूला है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के ‘हायर पेंशन’ (Higher Pension) आदेश के बाद, EPFO ने पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary) की गणना के लिए अंतिम 60 महीनों (5 साल) के औसत वेतन का फॉर्मूला लागू किया था।
पेंशनरों की मांग (36-Month Rule): कर्मचारियों की मांग है कि पेंशन की गणना 60 महीने के बजाय रिटायरमेंट से ठीक पहले के अंतिम 36 महीनों (3 साल) के औसत वेतन पर की जाए। चूँकि अंतिम वर्षों में कर्मचारी का वेतन सबसे अधिक होता है, इसलिए 36 महीनों का औसत निकालने पर पेंशन की राशि काफी बढ़ जाएगी।
पेंशन कैलकुलेशन फॉर्मूला (60 Months vs 36 Months)
इस चार्ट से समझें कि 36 महीने का नियम लागू होने से पेंशन में कैसे फायदा होगा:
| कैलकुलेशन का प्रकार | वेतन का औसत कैसे निकलेगा? | पेंशन पर प्रभाव (Impact) |
| वर्तमान नियम (60-Month) | रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों का औसत वेतन | पेंशन की राशि थोड़ी कम बनती है |
| मांग (36-Month Rule) | रिटायरमेंट से पहले के 36 महीनों का औसत वेतन | पेंशन की राशि बढ़कर मिलेगी |
EPFO Pension Scheme का लाभ किन्हें मिलता है?
अगर आप भी संगठित क्षेत्र (Organized Sector) में काम करते हैं, तो आपको EPS-95 का लाभ तभी मिलेगा जब आप निम्नलिखित शर्तें पूरी करते हों:
- आपने EPFO में कम से कम 10 साल का योगदान (Service) दिया हो।
- आपकी उम्र 58 वर्ष पूरी हो चुकी हो (50 वर्ष की उम्र से कम पेंशन लेने का विकल्प भी मौजूद है)।
- आपकी सैलरी का 8.33% हिस्सा हर महीने EPS अकाउंट में जमा होता हो।
निष्कर्ष (Conclusion)
साल 2026 में EPFO पेंशनधारकों को सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं। अगर ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन और 36 महीने के औसत वेतन वाला नियम लागू हो जाता है, तो यह देश के लाखों बुजुर्गों के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत (Financial Relief) होगी। किसी भी प्रकार की फेक न्यूज़ से बचें और ताज़ा अपडेट्स के लिए EPFO के आधिकारिक पोर्टल से जुड़े रहें।












